मप्र के शिवपुरी स्थित करैरा अभयारण्य के 32 गांवों की 36 हजार की आबादी अपनी ही जमीन पर मजदूरी करने को मजबूर है। जमीन गांवों के लोगों की है, लेकिन वे अपनी ही जमीन को न तो बेच सकते हैं और न ही इस पर सिंचाई के साधन लगवा सकते हैं। जब यह बात आसपास के गांव के लोगों को पता चली तो यहां रिश्ते आना ही बंद हो गए। इन गांवों के चार हजार से अधिक युवा कुंवारे हैं।
हाजीनगर के जंडेल सिंह गुर्जर बताते हैं कि गांव के आधे से अधिक युवा तीस से अधिक की उम्र पार कर चुके हैं। मेरी उम्र भी 33 पार हो चुकी है। लेकिन शादी नहीं हुई। मेरे दो छोटे भाई भी हैं, उनके लिए भी रिश्ते नहीं आ रहे हैं। गांव में वैसे भी शादी की उम्र 18 से 25 के बीच ही मानी जाती है। इसलिए इस क्षेत्र के ज्यादातर युवा अपनी शादी की आस छोड़ चुके हैं।
सरकार जमीन बता दे, जंगल हम तैयार कर देंगे : जून 2012 में सुप्रीम कोर्ट की एंपावर्ड कमेटी ने राज्य सरकार को पत्र भेजा कि करैरा अभयारण्य क्षेत्र में रजिस्ट्री पर लगी रोक हटाई जा सकती है। लेकिन इसमें एक शर्त जोड़ दी कि जितने क्षेत्र में अभयारण्य (दो सौ वर्ग किमी) है, उतने ही क्षेत्र में कहीं दूसरी जगह जंगल तैयार किया जाए। उधर लंगूरी गांव के लोगों का कहना है कि सरकार तो जमीन चिंहित कर दे, जंगल हम तैयार कर देंगे।
ऐसे गिर रहा सामाजिक स्तर
जमीन बेचने का अधिकार न होने से गांव के युवाओं की शादी नहीं हो पा रही है।
युवाओं पर परिवार की जिम्मेदारी न होने से वे अपराध व अवैध धंधे करने लगे हैं।
इसलिए नहीं हो रहीं शादियां
किसानों की जमीन करैरा अभयारण्य में है। अभयारण्य की जमीन को किसान खरीद और बेच नहीं सकते।
रिश्ते इसलिए नहीं आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें यह जानकारी है कि सरकार जमीन मालिकों को कभी भी बेदखल कर अभयारण्य से बाहर कर सकती है।
दूसरी ओर, मप्र के ही सोनचिरैया अभयारण्य के कारण घाटीगांव क्षेत्र के 27 गांवों के लोगों को होने वाली परेशानी का मामला गुरुवार को भाजपा सांसद यशोधरा राजे सिंधिया ने लोकसभा में उठाया। उन्होंने मांग की कि अभयारण्य की सीमा का डी-नोटिफिकेशन (अधिसूचना) रद्द की जाए। अब तो इसमें सोनचिरैया भी नहीं है। अभयारण्य के कारण आसपास के गांवों का विकास रुक गया है। क्षेत्र के किसान अपनी जमीन के मालिक तो हैं लेकिन जरूरत पडऩे पर इसे न बेच सकते हैं और न ही खरीद सकते हैं। किसान गरीबी में जीने को मजबूर हैं। सांसद सिंधिया की मांग पर अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जवाब देंगे।
सेमुअल दास की रिपोर्ट
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