Wednesday, 3 October 2012

रणथंभौर में हो रहा है बाघों का नामकरण


रणथंभौर अभयारण्य के बाघ अब नंबर की जगह नाम से जाने जाएंगे। वन विभाग पहली बार इन्हें नाम देने में जुटा है। हुस्नारा, सुंदरी, कृष्णा, रोमियो, जालिम और सुल्तान ऐसे कुछ नाम हैं, जो बाघों को दिए गए हैं। वन विभाग पहली बार इन नामों की स्थायी लिस्ट तैयार कर रिकॉर्ड में शामिल करने जा रहा है। इससे पहले बाघों को टी-1, टी-5 व टी-19 जैसे नंबरों से जाना जाता था। बाघों का नामकरण किए जाने के पीछे प्रमुख उद्देश्य पर्यटकों का उनसे भावनात्मक लगाव बढ़ाना और नर-मादा की पहचान साफ करना है।

विभाग का कहना है कि नंबरों से बाघ के मेल या फीमेल होने को लेकर भी टूरिस्ट भ्रमित रहते थे। इससे पर्यटकों के समक्ष बाघों के परिवार की जानकारी देने में भी आसानी होगी। अभयारण्य के डीएफओ वाईके साहू ने बताया कि कुछ बाघों को पहले ही नाम से जाना जाता था। अब सभी का पहली बार नामकरण हो रहा है। हालांकि नंबर भी रहेंगे।

बाघों को नाम उनके स्वभाव, शारीरिक लक्षण तथा अन्य रोचक बातों के आधार पर दिए जाएंगे। मानद वन्यजीव प्रतिपालक बालेंदु सिंह बताते हैं कि टी-6 बाघ अक्सर बाघिन टी-16 या टी-41 बाघिन लैला के साथ नजर आता है। कई बार तो यह बाघ टी-16 से मार भी खा चुका, लेकिन फिर उसके साथ हो लेता है। इस कारण इसका नाम रोमियो रखा गया है।

> टी-25 बाघ गुस्सैल है। वह टूरिस्ट की गाडिय़ों खासकर वनकर्मियों की मोटरसाइकिल को देखकर ज्यादा गुर्राता है, उसे स्टाफ ने ही जालिम नाम दे दिया।

> टी-3 बाघ ने बड़े भाई झुमरू को उसकी टेरेटरी से खदेड़कर बहादुरी दिखाई तो उसका नाम बहादुर रखा।

> टी-39 के शावक को चाल-ढाल के आधार पर 'सुल्तान' नाम मिला। टी-19 के तीन शावक आपस में अठखेलियां करते हैं उन्हें 'चंदा', 'सूरज' 'आकाश' नाम दिया।

अगर कोई हमें सिर्फ नंबर से पहचाने तो? बाघों के प्रति भावनात्मक रिश्ते बनाने के लिए नाम को स्थायी पहचान दी जा रही है। नाम के साथ नंबरिंग की व्यवस्था भी जस की तस रहेगी। -बीना काक, वन एवं पर्यटन मंत्री 

पहली बार बाघों के नाम की लिस्ट तैयार हो रही है। कुछ बाघों के पहले से ही प्रचलित नाम हैं। अन्य को उनके करेक्टर के हिसाब से नाम दे रहे हैं। -वाई के साहू, डीएफओ, रणथम्भौर नेशनल पार्क 

महेश शर्मा, दैनिक भास्‍कर के लिए 

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