Friday, 26 October 2012

रणथंभौर का यह खूंखार बाघ ले सकता है आपकी भी जान


रणथंभौर अभयारण्य में 25 अक्‍टूबर को को बाघ टी-24 ने सहायक वनपाल घीसू सिंह (58) को अपना शिकार बना लिया। वे जंगल में चल रहे कच्चे मार्ग के रिपेयरिंग को देखने के लिए गए थे। बाघ ने उनकी गर्दन व सिर पर हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटनास्थल पर पहुंचे वन अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम ने पटाखे चलाकर बाघ को भगाया और शव को उसके शिकंजे से छुड़ाया। घटना से वन विभाग सहमा हुआ है। घीसू सिंह के परिजनों को 3.20 लाख रु. की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा की गई है। 

प्रत्यक्षदर्शी फोरेस्टर सुदर्शन शर्मा ने बताया कि गुरुवार सुबह दस बजे वे जयपुर की चौमूं तहसील के अमरपुरा गांव निवासी सहायक वनपाल घीसू सिंह के साथ राजबाग वननाके से मोटरसाइकिल पर जंगल के लिए रवाना हुए थे। साढ़े दस बजे वे सोनकच्छ आंतरी नामक स्थान पर पहुंचे। यहां दो जगह पर्यटक वाहनों के लिए बने कच्चे रास्तों को ठीक करने का काम किया जा रहा था। शर्मा ने बताया कि वे पहले काम कर रहे श्रमिकों के पास रुक गए और घीसू सिंह 200 मीटर आगे काम देखने चले गए। वे काम देखकर पैदल वापस आ रहे थे तभी बाघ ने घीसू सिंह को बाघ ने दबोच लिया और खींचकर झाडिय़ों में ले गया। मजूदर व अन्य वनकर्मियों ने शोर मचाया और पत्थर फेंके, लेकिन वहां कुछ भी दिखाई नहीं दिया। सूचना मिलने के बाद उपवन संरक्षक एवं अन्य वन अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने झाडिय़ों में अपना वाहन घुसाया तो बाघ ने झपट्टा मारा। इसके बाद पटाखे चलाकर शव को मुक्त कराया गया। 

टी 24 का तीसरा इंसानी शिकार 

रणथंभौर अभयारण्य के सबसे बड़े इलाके में विचरण करने वाले खूंखार बाघ टी-24 ने अब तक तीन लोगों को शिकार बनाया है। इनमें एक खिरनी निवासी घमंडी माली, दूसरा शहर जुलाहा मोहल्ला निवासी अशफाक एवं तीसरा वनकर्मी घीसू सिंह है। हालांकि, इससे पहले भी इस बाघ द्वारा दो अन्य लोगों को भी शिकार बनाए जाने की आशंका है, लेकिन इनकी पुष्टि नहीं हुई। रणथंभौर के इतिहास में यह पहली घटना है जब किसी जानवर के हमले से वन विभाग के किसी कर्मचारी की मौत हुई है। 

सबसे खतरनाक बाघ

रणथंभौर से जुड़े लोगों के अनुसार इस समय इस जंगल में बाघ टी 24 का आतंक है। दिखने एवं स्वभाव में यह बाघ बहुत अधिक खूंखार है। यह पहला बाघ है जो अपने इलाके के अलावा दूसरे बाघों के इलाके में भी बे खोफ घूमता है। इसके विचरण का दायरा 90 वर्ग किमी से भी अधिक होने के कारण रणथंभौर के सबसे बड़े इलाके पर इसका राज है। यह बाघ बचपन से ही पर्यटक एवं वाहनों के पीछे दौडऩे का आदी रहा है।

बाघ परियोजना के दो जोन बंद

बाघ परियोजना में मानद वन्यजीव प्रतिपालक बालेंदूसिंह ने बताया कि इस घटना से रणथंभौर से जुड़े लोगही नहीं आम आदमी भी दुखी है। इस घटना को हम उसी प्रकार देखते हैं जिस प्रकार एक जवान देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की बाजी लगाता है। सिंह ने बताया कि घटना के बाद उप वन संरक्षक वाई.के. साहू ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए इस बाघ के विचरण वाले जोन नं. 1 एवं 3 पर अगले आदेश तक के लिए पर्यटक वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। साथ ही इस बाघ पर निगरानी के लिए एक टीम का भी गठन कर दिया है। इसके इलाके में अतिरिक्त कैमरा लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं।

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